Wednesday, October 4, 2023

गाँव स्वशासन और पेसा कानून (Rajasthan)


गाँव स्वशासन और पेसा कानून

पत्थलगढ़ी / शिलालेख

सन् 1865 में अंग्रेज सरकार द्वारा भारतीय वन विधेयक कानून लाया गया जिससे जंगल, वन.विभाग के एकाधिकार में आ गये। अंग्रेजों द्वारा इस काननू के जरिए जंगल को अपने नियंत्रण में लाने की प्रक्रिया शुरू की गयी जिसके कारण आदिवासियों की जमीन और जगंल से उनका अधिकार छीना जाने लगा। आदिवासी समाज जिस जमीन और जगंल को सामूहिक सम्पत्ति की तरह उपयोग करते थे। अंग्रेजों ने उन संसाधनों का व्यवसायीकरण करना शुरू कर दिया। आजादी के बाद से वही कानून आदिवासी समाज पर लागू है, जिसके कारण विभिन्न विकास योजनाओं में लगभग दो करोड़ आदिवासियों को विस्थापित होना पडा़। 

केन्द्र सरकार ने इस समस्या से आदिवासियों को छुटकारा दिलाने के उद्देश्य से वर्ष 1996 मे पंचायत उपबन्ध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार अधिनियम संसद द्वारा पारित किया गया जिससे आर्थिक एवं सामाजिक विकास व उनके विवाद निपटानें के तौर-तरिको को स्वशासन में मूल सिद्धान्त के रूप में सरंक्षण दिया जा सके। 
राजस्थान सरकार ने पंचायती राज (उपबन्धों का अनुसुचित क्षेत्रों में लागू होने सम्बन्धी उपान्तरण) अधिनियम तथा पेसा नियम 2011, नवम्बर माह 2011 से राज्य में लागू कर दिया। पेसा कानून में आदिवासी जनता को दिये गये अधिकार - 

1. मदिरा पर नियंत्रण - गाँव सभा समाज में शराब पीने से होने वाली बुराइयों से निपटने के लिए गाँव के लोगों के शराब पीने, गाँव में लोगों द्वारा शराब बनाने और गाँव में शराब बिक्री पर नियंत्रण कर सकती है। इसके लिए गाँव सभा बैठक करके एक संकल्प पत्र हस्ताक्षर करके इसकी एक प्रति जिला कलेक्टर और आबकारी आयुक्त राजस्थान, उदयपुर को भेजेगी। 

कलेक्टर, तहसीलदार रैंक के किसी वरिष्ठ अधिकारी या किसी समुचित अधिकारी को संकल्प पत्र की वास्तविकता को सत्यापित करने के लिए नियुक्त करेगा। अधिकारी जो अपनी रिर्पोट कलेक्टर को देगा उसे अपनी टिप्पणी के साथ कलेक्टर आबकारी आयुक्त, राजस्थान, उदयपुर को भेजेगा। आबकारी आयुक्त गाँव सभा मे ं संकल्प को कार्यान्वित करने के लिए आवश्यक कार्यवाही करेगा और गाँव सभा को जिले के कलेक्टर के माध्यम से सूचित करेगा। 

ग्राम सभा विशेष अवसरों जैसे नामकरण संस्कार, सगाई, विवाह, विवाद निपटारा के दौरान, मृत्युभोज, होली, दिपावली और आदिवासी जनजाति समुदाय की परम्पराओं और रूढ़ियों को ध्यान में रखते हुए ऐसे अन्य सामाजिक अवसरों पर गाँव सभा के निवासियों द्वारा देशी शराब के कब्जे व सीमायें निर्धारित करने के लिए सक्षम होगी।

2. जमीन की रक्षा - गाँव सभा यह सुनिश्चित कर सकती है कि अनुसूचित जनजातियों की जमीन गैर अनुसूचित जनजाति के व्यक्तियों को हस्तांतरित नहीं की जायेगी। गैर कानूनी ढ़गं से कब्जा की गयी जमीन को गाँव सभा वापस ले सकती है।

एक मजबूत गाँव सभा अपने प्राकृतिक ससंlधनों (जल, जंगल,जमीन और पहाड), की रक्षा करने में सक्षम है। चूकि आदिवासी क्षेत्रों मे बढते भूमि और पहाड़ों के अधिग्रहण (बांध और खनन) आदिवासीयों के अस्तित्व के लिए सबसे बडी़ चुनौती है। इसके लिए एक मजबूत ग्राम सभा पेसा कानून का उपयोग करते हुए अपनी जमीन और पहाड़ों को बचा सकती है।

3. भूमि अधिग्रहण - जब सरकार किसी अधिनियम के तहत भूमि का अधिग्रहण करना चाहती है तब सरकार गाँव सभा को प्रस्ताव के साथ निम्नलिखित जानकारी प्रस्तुत करेगी-

परियोजना की सम्पूर्ण रूपरेखा व प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण का रकबा व गाँव में बसने वाले नये लोग व समाज व पर्यावरण पर परियोजना का सम्भावित प्रभाव व गाँव के लोगों की प्रस्तावित भागीदारी (मुआवजे की राशि और रोजगार के अवसर) सम्पूर्ण जानकारी प्राप्त करने के बाद भूमि अधिग्रहण से प्रभावित गाँव सभायें सरकार या प्राधिकरण के प्रतिनिधियों को उपरोक्त पांचो जानकारीयों की सत्यता के परिक्षण के लिए गाँव सभा की बैठक में बुला सकती है। इस प्रकार से बुलाये गये व्यक्ति को सभी जानकारी सही से देना अनिवार्य है।

village PESA meeting 

4. लघु वन उपज पर मालिकाना अधिकार - गाँव सभायें लघुवन उपज का सग्रह, उपयोग कर सकती है। जिविका के लिए लघुवन उपज में शहद, मोम, छाल, महुआ, फूल, ऑयल सीड्स, जगंली झाड़िया, शाक, आंवला, बहेडा, आम, सीताफल, पपीता, जामुन, चारा, पलाश के पत्ते, बांस, जड़ी-बूटिया, बेत आदि उत्पाद शामिल है। 

5. गाँव के जल संसंसाधन - गाँव सभा गाँव के छोटे जल संसााधन जैसे नाला, तालाब, एनीकट का निर्माण और प्रबंधन गाँव सभा के अंतर्गत होगा l

6. गौण खनिज - गाँव सभा की सीमा में पाये जाने वाले गौण खनिज पर गाँव सभा का अधिकार है। गौण खनिज के सर्वे की अनुमति गाँव सभा से लेनी होगी। निलामी से लेकर खनन के मामलों में रियायत देने के पहले सिफारिश का अधिकार गाँव सभा को है।

7. गाँव के हाट बाजार के प्रबंधन का अधिकार - गाँव सभा स्थानीय स्तर पर लगने वाले दिहाडी बाजार, हाट बाजार, मेले आदि का आयोजन, उसके स्थान, पेयजल, सुरक्षा, संचालन का प्रबन्ध करेगी। इसके लिए गाँव सभा कुछ सदस्यों की समिति भी गठित कर सकती है और उसे इसकी जिम्मेदारी दे सकती है।

8. कर्ज के लेन-देन पर नियत्रंण - सूदखोर, महाजन, सरकारी या गैर सरकारी बैंकों, भूमि विकास बैंकों द्वारा आदिवासीयों को उधार देने पर गाँव सभा नियत्रंण रखेगी। किसी भी प्रकार से मूलधन से ज्यादा ब्याज नहीं वसूला जा सकेगा। उधार पर धन देने वालों को पंचायत से लाइसेन्स लेना अनिवार्य है, गैर कानूनी पाये जाने पर विधिवत कार्यवाही की जा सकती है और उन पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

9. विकास कार्यों के बारे में - सरकार की विभिन्न योजनाओ, कार्यक्रमों और जनयोजनाओं को कब, कहां और कैसे कार्यान्वित करना है इसके बारे में सबसे पहले गाँव सभा से अनुमति लेनी होगी। गरीबी उन्मूलन और अन्य कार्यक्रमों के अधीन लाभार्थियों के रूप में व्यक्तियों की पहचान और चयन का पूरा अधिकार गाँव सभा को है। 

10. वित्तिय व्यवस्था - गाँव पंचायत के लिए योजनाओं, कार्यक्रमों और परियोजनाओं के लिए आने वाली सभी निधियों पर गाँव सभा का नियंत्रण होगा। जो भी खर्च किया जायेगा उसका उपयोगिता प्रमाण-पत्र गाँव सभा को देना होगा।

11. संस्था और कार्यकर्ता पर नियंत्रण - पाचंवी अनुसूची क्षेत्रों में कार्यरत विभिन्न सरकारी, गैर सरकारी संस्थाओं जो क्षेत्र में विकास के लिए कार्य कर रहे है, ऐसी सस्ंथाआ,ेएजेंसियों जैसे उप स्वास्थ्य केन्द्र, आंगनवाड़ी, विद्यालय, पंचायतीराज संस्थान तथा स्थानीय कर्मचारीयों जैसे पटवारी, सचिव, अध्यापक, एनम आदि तथा गैर सरकारी कार्यकर्ता पर भी गाँव सभा का नियंत्रण होगा जिससे उन पर किये जा रहे खर्च एवं उपयोगिता परिभाषित हो सके।

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