Sunday, September 13, 2020

किसान और तीन अध्य्यादेश के बारे में मेरे विचार (Dheeraj salvi)

किसान की परेशानी :- खेती या घटिया राजनीती 

जब मुंबई कंगना का ऑफिस तोडा जाता है तो देश का हर चेनल इसे कवरेज दे रहा है , देश में बवाल खड़ा कर दिया गया है, राजनीती हो रही है l  और जहाँ दूसरी और किसानो को दबाया कुचला जा रहा है वो कही नहीं दिख रहा है l वाह !! क्या नया देश बन रहा है ? क्या मिडिया है ? और क्या राजनीती की चर्चा है ? वाकई देश बदल रहा है l

वर्तमान सरकार देश में ईस्ट इंडिया कम्पनी का माहोल बना रही है सरकार l पहले जमीन हड़पने का अध्य्यादेश लायी थी अब तीन एसे अध्य्यादेश लायी है जिससे किसानो की खेती ही हड़प हो जाएगी l सरकार का कहना है की किसान अपनी फसल कहीं भी बेच सकता है लेकिन क्या गारंटी है कि फसल बिक ही जाएगी और माल का सही मूल्य मिल जायेगा l 14 करोड़ 65 लाख किसान है देश में l 86 प्रतिशत किसान है जिनके पास 5 एकड़ से कम जमीन है l वो क्या अपनी फसल को अपने जिले से बाहर बेचेगे l यह बाते सिफ कागजो में अच्छी लगती है हमारे देश का सिफर 6 प्रतिशत किसान MSP के दायरे में आता है l जो अद्द्यादेश आया है उसमे किसानो की खुशी कहाँ है l सारे राज्यों में यही स्थिति है 62 किसान संगठन इसके विरोध में है l यहाँ 14 करोड़ से अधिक किसान है जो दुसरे जिले के जाके कैसे अपनी फसल बेचेगे जब उनके पास उतना होता ही नहीं है l अभी जो आन्दोलन हो रहा है उसमे सेकड़ो किसानो को गिरफ्तार कर दिया गया है l आज देश की जीडीपी 23.9 से नीचे चली गयी है सिर्फ किसान ने ही इसे बचा रखा है l कृषि क्षेत्र में विकास दर 3.4 फीसदी है l और जब वे अपने हक के लिए आवाज उठा रहे है और आन्दोलन कर रहे है तो पुलिसिया दमन हो रहा है उन पर लाठियां बरस रही है l क्यों भाई ? आपके कोरोना काल में संकट में बचाने का ईनाम दे रहे हो क्या ?

वन नेशनल – वन मार्किट – किसानो को डर है कि इसके जरिये राज्यों के मंदी एक्ट को को केवल मंदी तक ही सिमित कर दिया है l अब कही पर भी फसल की खरीद फरोख्त की जा सकती है, बस मंदी में खरीदने और बेचने पर मंदी का शुल्क लगेगा लेकिन बाहर शुल्क से छुट होगी l

कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग – किसान अपनी फसल को बेचने के लिए कम्पनियों के साथ करार कर ले कि आप मेरी फसल का मूल्य देकर ले लेंगे l

वस्तू अधिनियम में बदलाव – पहले भण्डारण पर रोक होती थी, कि आप इतना ही खरीद सकते है और इतना ही भण्डारण कर सकते है l आलू, प्याज, टमाटर, तिलहन आदी की l अब वो भण्डारण पर रोक हट गयी है – मर्जी हो इतना जमा करो l अब इससे किसानो को डर ये है कि अब फसल की कालाबाजारी शुरू हो जाएगी l माल को थोक में खरीद लिया जायेगा और जब जरुरत पड़ने पर किसानो का माल नहीं ख़रीदा जायेगा l 

एक कानून बताये जो किसान को अपना माल मंडी से बाहर बेचने से रोकता है किसान पर कोई पाबंदी नहीं है l यह पाबंदी तो व्यापारियों के लिए है l पी.एम. साहब ने क्या एहसान कर दिया ऐसा अद्द्यादेश लाकर l किसान को तो यह गारंटी चाहिए की ऐसी जगह हो जहाँ वो MSP से बेच सके l जब वो किसान जिस चीज को मांग नहीं रहा है और उसकी जरुरत भी नहीं है तो उसे क्यों दे रहे हो ? बेफालतू का एहसान कर रहे हो जिससे कुछ और नहीं आपकी ही फजीहत होनी है l

आप किसान का कितना भला कर रहे हो ? देश का किसान तो ख़ुशी के मारे आपको माला पहना देगा l अब बस करो हम तो पागल ही हो जायेगे l

आप रात के अधेरे में क्यों ऐसा काम कर रहे हो ? कब देश के किसान संगठनो से मिल कर बात हुई है ? जरुर नियत में खोट है तभी तो चोरी छिपे एसा काम कर रहे हो ? अगर भला चाहते हो तो खुल कर सबके साथ बात करके काम करते ये l

क्या मजाक है ये पी.एम. साहब? महाराष्ट्र में स्वाभिमानी पक्ष का कहना है कि ये जो कदम उठाया है यह किसानो के आर्थिक आजादी की ओर पहला कदम है l किसान सही मायने में आर्थिक आजाद हो जायेगा l उसको वो कीमत मिलेगी जिसके लिए वो मेहनत करता है l

ऐसा लगता है जैसे कुछ सालो पहले पिपली लाइव जो मूवी आई थी वो आज सार्थक साबित की जा रही है l भाई मंत्रीलोगो ! कही तुम देश की जनता और किसानो को बॉलीवुड तो नहीं समझ बैठे हो ? या फिर अपने आप को करन जोहर या यश चोपड़ा ही मान लिए हो l

इन तीनो अध्य्यादेशो से देश के किसानो को  नुकसान है लेकिन कोरपोरेट जगतौर बिचोलियों को बहुत फायदा होगा l इससे इनकी मनमानी बढ़ जाएगी l और इसके आलावा किसान के पास कोई विकल्प ही नहीं है l सरकार नंयूनतम मूल्य दिलाने की कोई बात तो कर ही नहीं रही है

बड़ी ऊँची आवाज में कहते हो किसानो की आय दोगुनी हो जाएगी l सरकार इन्हें मारने वाले भी आप ही है l फाँसी पर लटका वो किसान, उसका खेत, उसका परिवार और उसकी फसल आपको देख रही है l भाई जवाब तो आपसे मांग सकते नहीं है क्योकि आप तो सरकार है l जिसे उन्होंने खुद चुना है, तो बिचारे लाठियां ही खा रहे है है l आखिर लाठी भी तो उनके ही जंगलो से आ रही है l 


No comments:

Post a Comment

गाँव स्वशासन और पेसा कानून (Rajasthan)

गाँव स्वशासन और पे सा   कानून पत्थलगढ़ी / शिलालेख सन् 1865 में अंग्रेज सरकार द्वारा भारतीय वन विधेयक कानून लाया गया जिससे जंगल, वन.विभाग के ए...