किसान की परेशानी :- खेती या घटिया राजनीती
जब मुंबई कंगना का ऑफिस तोडा जाता है तो देश का
हर चेनल इसे कवरेज दे रहा है , देश में बवाल खड़ा कर दिया गया है, राजनीती
हो रही है l और जहाँ दूसरी और
किसानो को दबाया कुचला जा रहा है वो कही नहीं दिख रहा है l वाह !! क्या नया
देश बन रहा है ? क्या मिडिया है ? और क्या राजनीती की चर्चा है ? वाकई देश बदल रहा
है l
वर्तमान सरकार देश में ईस्ट इंडिया कम्पनी का
माहोल बना रही है सरकार l पहले जमीन हड़पने का अध्य्यादेश लायी थी अब तीन एसे
अध्य्यादेश लायी है जिससे किसानो की खेती ही हड़प हो जाएगी l सरकार का कहना है
की किसान अपनी फसल कहीं भी बेच सकता है लेकिन क्या गारंटी है कि फसल बिक ही जाएगी
और माल का सही मूल्य मिल जायेगा l 14 करोड़ 65 लाख किसान है देश में l 86 प्रतिशत किसान
है जिनके पास 5 एकड़ से कम जमीन है l वो क्या अपनी फसल को अपने जिले
से बाहर बेचेगे l यह बाते सिफ कागजो में अच्छी लगती है हमारे देश का सिफर 6
प्रतिशत किसान MSP के दायरे में आता है l जो अद्द्यादेश आया है उसमे
किसानो की खुशी कहाँ है l सारे राज्यों में यही स्थिति है 62 किसान संगठन इसके विरोध
में है l यहाँ 14 करोड़ से अधिक किसान है जो
दुसरे जिले के जाके कैसे अपनी फसल बेचेगे जब उनके पास उतना होता ही नहीं है l अभी जो आन्दोलन हो
रहा है उसमे सेकड़ो किसानो को गिरफ्तार कर दिया गया है l आज देश की जीडीपी 23.9 से नीचे
चली गयी है सिर्फ किसान ने ही इसे बचा रखा है l कृषि क्षेत्र में विकास दर
3.4 फीसदी है l और जब वे अपने हक के लिए आवाज उठा रहे है और आन्दोलन कर
रहे है तो पुलिसिया दमन हो रहा है उन पर लाठियां बरस रही है l क्यों भाई ? आपके
कोरोना काल में संकट में बचाने का ईनाम दे रहे हो क्या ?
वन नेशनल – वन मार्किट – किसानो को डर है कि इसके जरिये राज्यों के मंदी एक्ट को को
केवल मंदी तक ही सिमित कर दिया है l अब कही पर भी फसल की खरीद
फरोख्त की जा सकती है, बस मंदी में खरीदने और बेचने पर मंदी का शुल्क लगेगा लेकिन
बाहर शुल्क से छुट होगी l
कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग – किसान अपनी फसल को बेचने के लिए कम्पनियों के साथ करार कर
ले कि आप मेरी फसल का मूल्य देकर ले लेंगे l
वस्तू अधिनियम में बदलाव – पहले भण्डारण पर रोक होती थी, कि आप इतना ही खरीद सकते है और इतना ही भण्डारण कर सकते है l आलू, प्याज, टमाटर, तिलहन आदी की l अब वो भण्डारण पर रोक हट गयी है – मर्जी हो इतना जमा करो l अब इससे किसानो को डर ये है कि अब फसल की कालाबाजारी शुरू हो जाएगी l माल को थोक में खरीद लिया जायेगा और जब जरुरत पड़ने पर किसानो का माल नहीं ख़रीदा जायेगा l
एक कानून बताये जो किसान को अपना माल मंडी से बाहर
बेचने से रोकता है किसान पर कोई पाबंदी नहीं है l यह
पाबंदी तो व्यापारियों के लिए है l पी.एम. साहब ने क्या एहसान
कर दिया ऐसा अद्द्यादेश लाकर l किसान को तो यह गारंटी
चाहिए की ऐसी जगह हो जहाँ वो MSP से बेच सके l जब वो
किसान जिस चीज को मांग नहीं रहा है और उसकी जरुरत भी नहीं है तो उसे क्यों दे रहे
हो ? बेफालतू का एहसान कर रहे हो जिससे कुछ और नहीं आपकी ही फजीहत होनी है l
आप किसान का कितना भला कर रहे हो ? देश का किसान
तो ख़ुशी के मारे आपको माला पहना देगा l अब बस करो हम तो पागल ही
हो जायेगे l
आप रात के अधेरे में क्यों ऐसा काम कर रहे हो ?
कब देश के किसान संगठनो से मिल कर बात हुई है ? जरुर नियत में खोट है तभी तो चोरी
छिपे एसा काम कर रहे हो ? अगर भला चाहते हो तो खुल कर सबके साथ बात करके काम करते
ये l
क्या मजाक है ये पी.एम. साहब? महाराष्ट्र में
स्वाभिमानी पक्ष का कहना है कि ये जो कदम उठाया है यह किसानो के आर्थिक आजादी की
ओर पहला कदम है l किसान सही मायने में आर्थिक आजाद हो जायेगा l उसको
वो कीमत मिलेगी जिसके लिए वो मेहनत करता है l
ऐसा लगता है जैसे कुछ सालो पहले “पिपली लाइव” जो मूवी आई थी वो आज
सार्थक साबित की जा रही है l भाई मंत्रीलोगो ! कही तुम देश की जनता और किसानो को
बॉलीवुड तो नहीं समझ बैठे हो ? या फिर अपने आप को करन जोहर या यश चोपड़ा ही मान लिए
हो l
इन तीनो अध्य्यादेशो से देश के किसानो को नुकसान है लेकिन कोरपोरेट जगतौर बिचोलियों को
बहुत फायदा होगा l इससे इनकी मनमानी बढ़ जाएगी l और इसके आलावा किसान के
पास कोई विकल्प ही नहीं है l सरकार नंयूनतम मूल्य दिलाने की कोई बात तो कर ही नहीं रही
है l
बड़ी ऊँची आवाज में कहते हो किसानो की आय दोगुनी हो जाएगी l सरकार इन्हें मारने वाले भी आप ही है l फाँसी पर लटका वो किसान, उसका खेत, उसका परिवार और उसकी फसल आपको देख रही है l भाई जवाब तो आपसे मांग सकते नहीं है क्योकि आप तो सरकार है l जिसे उन्होंने खुद चुना है, तो बिचारे लाठियां ही खा रहे है है l आखिर लाठी भी तो उनके ही जंगलो से आ रही है l
No comments:
Post a Comment