Water & water conservation : Indra Gandhi Canal & Desert Area of Rajasthan, India
जल और जल-संरक्षण – इंदिरा गाँधी नहर और राजस्थान का रेगिस्तानी इलाका

प्रकृति के अनमोल धरोहर मे से एक “जल” हैl “जल ही जीवन हैl” और हम सभी इसी बात से सहमत भी हैl “जल” मानव जीवन के लिए पहली प्राथमिक आवश्यकता है, इसी की मदद से मानव ने अपनी आवश्यकताओ को पूरा किया है और बड़े ही आश्चर्यजनक कार्य किये हैl “जल” हर युग, हर परिस्थिति में सबके केंद्र में और शुरुआत में रहा हैl “जल” ने इस धरती पर जहाँ जीवन देने का कार्य किया है वही अनकोनेक रूप बनाये और बिगाड़े है l
“पानी की है एक कहानी – आज जो है बयानी”l
वर्तमान में सारी
दुनिया पर्यावरण अध्ययन पर जोर दे रही हैl यह आर्थिक विकास का दौर है जिसमे विकास तो हो रहा है लेकिन
विकास की तुलना में प्राकृतिक संसाधनो का भारी दोहन हो रहा है l मानव के विकास से सम्बंधित यह दौड़ अनियंत्रित, असंतुलित और कही न कही अप्राकृतिक भी है l अब शायद मानव को यह समझ आने लगा है कि यह मानव
समाज की “मानव-विकास”
की नहीं “मानव-विनाश” की ओर दौड़ हैl यही वजह है कि मानव
अब अपने सुरक्षित भविष्य को लेकर चिंतित हो रहा है और उपाय ढूंढ रहा है l धरती पर ‘जल’ एक अत्यधिक विरल संसाधन बनता जा रहा हैl ‘जल’ से सम्बंधित स्थितिया धीरे-धीरे गंभीर होती जा
रही है l

सुखा ग्रस्त खेत में त्रस्त किसान और बारिश की नाउम्मीदी
जनसँख्या की तीव्र वृद्धि और असीमित आकांक्षाओ ने जल के उपयोग के साथ ही दुरुपयोग को भी बेहिसाब बढ़ा दिया हैl लेकिन अगर इसके एवज में जल का समुचित प्रबंधन और संरक्षण नहीं किया जा रहा हैl जिसके चलते आज पूरी दुनिया के सामने ‘जल-संकट’ एक बड़ी ज्वलंत समस्या बनता जा रहा हैl बेहिसाब जल-दोहन, दुरूपयोग ने इस बहुमूल्य संसाधन को खतरे में पहुंचा दिया हैl
इसका एकमात्र उपाय ‘जल-प्रबंधन’ हैl


थार का रेगिस्तान
भारत में 2.34 लाख वर्ग किमी. जमीन पर मरुस्थल विद्यमान है l भारत में दो प्रकार के मरुस्थल हैl भारत के उत्तर-पश्चिम हिस्से में फैले मरुस्थल का 91 प्रतिशत क्षेत्र राजस्थान में ही हैl राजस्थान के 63.5 प्रतिशत भू-भाग पर मरुस्थल फैला हुआ हैl पश्चिमी राजथान के जैसलमेर में शुष्क मरुस्थल अवस्थित हैl रेगिस्तान प्रकृति की एक अद्भुत संरचना का ही नमूना हैl विशालकाय रेत के धौरे, गर्म लू के जानलेवा थपेड़े, भूमिगत जल का अभाव से ग्रषित किसी भी मरुस्थलीय क्षेत्र में “जल” एक भयंकर त्रासदी और विकट समस्या है l प्राकृतिक जल राजस्थान के लिए हमेशा ही एक ऐसी पहेली रहा है कि यहाँ सब कुछ मिल जायेगा लेकिन पानी नहीं मिल पता था l


लम्बे अरसे तक तक बारिश नहीं होती और अगर बारिश होती भी तो इतना न्यूनतम की प्रकृति के किसी भी प्राणमय जीवन के लिए प्रयाप्त नहीं होती फिर चाहे वो पेड़ हो या जीव-जंतु और मनुष्यl कुओं में पानी नहीं और हैण्डपंप भी एकदम बेकार l यहाँ पानी की उपलब्धता, इसके विकास के कार्य और जल के स्थायीपन के लिए कार्य करना सीधे प्रकृति को चुनौती देने के समान ही है l सतही जलस्रोत जीवन और विकास के लिए महत्त्वपूर्ण और उपयोगी है l
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| कोटा जिले के एक गाँव में कुँए से पानी निकालने की जद्दोजेहत |


लेकिन इसके साथ ही
समस्याएं भी बढती चली जा रही है, उचित प्रबंधन, योजना और निरंतर शोध के अभाव में “जल-प्रबंधन” में चुनोतियो का सामना करना पड़ रहा हैl जो की सवाभाविक हैl यदि समय रहते इन समस्याओ का हल नहीं निकला तो
क्षेत्र का भविष्य खतरे में नजर आता है l “जल-संरक्षण” में भविष्य में पर्यावरण, पारिस्थिकी प्रकृति पर अनुकूल और प्रतिकूल प्रभावो का
वैज्ञानिक अध्ययन, तकनिकी नियोजन की भी बहुत आवश्यकता है l इंदिरा गाँधी नहर परियोजना से यहाँ के पर्यावरण, वातावरण, सथानीय पारिस्थिकी में परिवर्तन आ रहे है जो
दृष्टिगोचर भी हैl जैसे – विश्व
प्रसिद्ध सेवन घास के क्षेत्र समाप्त हो रहे है या मरुस्थल सिमट रहे हैl यहाँ की जैविक विविधता भी परिवर्तित हो रही है, स्थानीय छोटी-बड़ी वन्य-जीव
प्रजातीया समाप्त हो रही है l राजस्थान में इंदिरा गाँधी नहर के उचित
प्रबंधन और “जल-प्रबंधन” के कार्यो में नीतिगत एवं क्रियान्वयन में इच्छा शक्ति भक्ति की कमी रही हैl यहाँ जो भी विकास हो रहा है वो स्थानीय
पारिस्थितिकी के अनुकूल नहीं हो रहा है l क्षेत्र में प्राकृतिक संसाधनों का भारी मात्रा में दोहन किया जा रहा है l इंदिरा गांधी नहर निकले जाने से क्षेत्र में
खनिज संसाधन विकास को भारी प्रोत्साहन मिला है, खनिज व्यवसाय को इतनी सुविधा और
तेजी से संसाधन का दोहन, शोधन एवं खोज में बहुत इजाफा हो गया है l इस क्षेत्र से तेल, प्राकृतिक गैस, और अन्य खनिजो का तेजी से खनन
हो रहा है जिसे दुसरे शब्दों में हम संसाधन का अनियमित दोहन भी कह सकते है l नहर के आने से भूमिगत जल – स्तर में सुधर आ रहा
है लेकिन बारिश में पानी की अधिकता से जलाक्रांत की समस्या भी आने लगी है l जैसा कि बाड़मेर में अक्सर बारिश में होने लगा
है l
हाल में, जयपुर : राजस्थान सरकार ने एक नोटिस जारी किया है l जिसमे 13 तहसीलों के 1388 गाँवो को सुखा ग्रस्त घोषित कर दिया है l जिसमे बाड़मेर, जैसलमेर, जोधपुर, और हनुमानघड जिले के गाँव शामिल
है l यह ऑफिसियल स्टेटमेंट नोव्म्बेर,2019 को निकला है l इसमें 223 गाँव बाड़मेर, 672 गाँव जैसलमेर, 310 गाँव जोधपुर और 183
गाँव हनुमानगड के है l
इदिरा गाँधी नहर क्षेत्र में कुछ खास समस्याए भी देखि जा सकती है जैसे –
1.
पारिस्थिकी परिवर्तन
2.
जलाक्रांत की समस्या
3.
सेवन घास क्षेत्र
सिमटना
4.
राष्टीय मरूउद्यान को
संकट
5.
वन्य जीव-जन्तुओ पर
संकट
6.
सिमित प्राकृतिक
संसाधनों का अत्यधित, अनियंत्रित दोहन
7.
प्रदुषण
8.
स्थायित्व के
प्रतिकूल विकास
9. संतुलन और उचित प्रबंधन न होना
यदि बात अब समाधान की चले तो जो भी समस्याए है उनका सही, चरणबद्ध तरीके और सही से योजना बन कर हल करने की कोशिश की जाये तो ये सभी समस्याए दूर हो सकती है l
