Tuesday, September 15, 2020

List of Presidents of India

 भारत के राष्ट्रपतियों की सूची

भारत का राष्ट्रपति देश का मुखिया और भारत का प्रथम नागरिक है। राष्ट्रपति के पास भारतीय सशस्त्र सेना की भी सर्वोच्च कमान है। भारत का राष्ट्रपति लोक सभा, राज्यसभा और विधानसभा के निर्वाचित सदस्यों द्वारा चुना जाता है। भारत के राष्ट्रपति का कार्यकाल 5 वर्षों का होता है। राष्ट्रपति भवन का मुख्य द्वार, जो भारत के राष्ट्रपति का अधिकारिक आवास है l

भारत की स्वतंत्रता से अबतक 13 राष्ट्रपति हो चुके है। भारत के राष्ट्रपति पद की स्थापना भारतीय संविधान के द्वारा की गयी है। इन 13 राष्ट्रपतियों के अलावा 3 कार्यवाहक राष्ट्रपति भी हुए है। भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ॰ राजेंद्र प्रसाद थे। दो राष्ट्रपति, ज़ाकिर हुसैन और फ़ख़रुद्दीन अली अहमद, जिनकी पदस्थ रहते हुए मृत्यु हुई

पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल भारत की पहली महिला राष्ट्रपति है।

भारत के राष्ट्रपतियों की सूचि इस प्रकार है ( अंत में चित्र संग्रह)

क्र.सं

नाम

पदग्रहण

पदमुक्त

उपराष्ट्रपति

1

डॉ॰राजेंद्रप्रसाद

26 जनवरी 1950

13 मई 1962

डॉ॰सर्वपल्ली राधाकृष्णन

2

डॉ॰सर्वपल्ली राधाकृष्णन

13 मई 1962

13 मई 1967

ज़ाकिर हुसैन

3

ज़ाकिर हुसैन

13 मई 1967

03 मई 1969

वराहगिरि वेंकट गिरि

4

वराहगिरि वेंकट गिरि 

03 मई 1969

20 जुलाई 1969

5

मुहम्मद हिदायतुल्लाह

20 जुलाई 1969

24अगस्त 1969

6

वराहगिरि वेंकट गिरि 

24 अगस्त 1969

24 अगस्त 1974

गोपाल स्वरुप पाठक

7

फ़ख़रुद्दीन अली अहमद

24 अगस्त 1974

11 फ़रवरी 1977

बासप्पा दनप्पा जत्ती

8

बासप्पा दनप्पा जत्ती 

11 फ़रवरी 1977

25 जुलाई 1977

9

नीलम संजीव रेड्डी

25 जुलाई 1977

25 जुलाई 1982

मुहम्मद हिदायतुल्लाह

10

ज्ञानी जैल सिंह

25 जुलाई 1982

25 जुलाई 1987

रामास्वामी वेंकटरमण

11

रामास्वामी वेंकटरमण 

25 जुलाई 1987

25 जुलाई 1992

शंकरदयाल शर्मा

12

शंकरदयाल शर्मा 

25 जुलाई 1992

25 जुलाई 1997

के. आर. नारायणन

13

के. आर. नारायणन 

25 जुलाई 1997

25 जुलाई 2002

कृष्ण कान्त

14

ऐ.पी.जे. अब्दुल कलाम

25 जुलाई 2002

25 जुलाई 2007

भैरोंसिंह शेखावत

15

प्रतिभा पाटिल

25 जुलाई 2007

25 जुलाई 2012

मोहम्मद हामिद अंसारी

16

प्रणब मुखर्जी

25 जुलाई 2012

24 जुलाई 2017

मोहम्मद हामिद अंसारी

17

रामनाथ कोविन्द

25 जुलाई 2017

25 July 2022

वेंकैया नायडू

 चित्र संग्रह - 

Dr. Rajendra Prasad

S.Radhakrishnan

Zakir-Husain
v v giri

Fakhruddin_Ali_Ahmed
NeelamSanjeevaReddy

Giani_Zail_Singh

Ramaswamy_Venkataraman

Shankar_Dayal_Sharma
K R Narayanan

APJ Abdul Kalam
Pratibha patil
Pranab_Mukherjee
Ramnath Kovind

Sunday, September 13, 2020

किसान और तीन अध्य्यादेश के बारे में मेरे विचार (Dheeraj salvi)

किसान की परेशानी :- खेती या घटिया राजनीती 

जब मुंबई कंगना का ऑफिस तोडा जाता है तो देश का हर चेनल इसे कवरेज दे रहा है , देश में बवाल खड़ा कर दिया गया है, राजनीती हो रही है l  और जहाँ दूसरी और किसानो को दबाया कुचला जा रहा है वो कही नहीं दिख रहा है l वाह !! क्या नया देश बन रहा है ? क्या मिडिया है ? और क्या राजनीती की चर्चा है ? वाकई देश बदल रहा है l

वर्तमान सरकार देश में ईस्ट इंडिया कम्पनी का माहोल बना रही है सरकार l पहले जमीन हड़पने का अध्य्यादेश लायी थी अब तीन एसे अध्य्यादेश लायी है जिससे किसानो की खेती ही हड़प हो जाएगी l सरकार का कहना है की किसान अपनी फसल कहीं भी बेच सकता है लेकिन क्या गारंटी है कि फसल बिक ही जाएगी और माल का सही मूल्य मिल जायेगा l 14 करोड़ 65 लाख किसान है देश में l 86 प्रतिशत किसान है जिनके पास 5 एकड़ से कम जमीन है l वो क्या अपनी फसल को अपने जिले से बाहर बेचेगे l यह बाते सिफ कागजो में अच्छी लगती है हमारे देश का सिफर 6 प्रतिशत किसान MSP के दायरे में आता है l जो अद्द्यादेश आया है उसमे किसानो की खुशी कहाँ है l सारे राज्यों में यही स्थिति है 62 किसान संगठन इसके विरोध में है l यहाँ 14 करोड़ से अधिक किसान है जो दुसरे जिले के जाके कैसे अपनी फसल बेचेगे जब उनके पास उतना होता ही नहीं है l अभी जो आन्दोलन हो रहा है उसमे सेकड़ो किसानो को गिरफ्तार कर दिया गया है l आज देश की जीडीपी 23.9 से नीचे चली गयी है सिर्फ किसान ने ही इसे बचा रखा है l कृषि क्षेत्र में विकास दर 3.4 फीसदी है l और जब वे अपने हक के लिए आवाज उठा रहे है और आन्दोलन कर रहे है तो पुलिसिया दमन हो रहा है उन पर लाठियां बरस रही है l क्यों भाई ? आपके कोरोना काल में संकट में बचाने का ईनाम दे रहे हो क्या ?

वन नेशनल – वन मार्किट – किसानो को डर है कि इसके जरिये राज्यों के मंदी एक्ट को को केवल मंदी तक ही सिमित कर दिया है l अब कही पर भी फसल की खरीद फरोख्त की जा सकती है, बस मंदी में खरीदने और बेचने पर मंदी का शुल्क लगेगा लेकिन बाहर शुल्क से छुट होगी l

कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग – किसान अपनी फसल को बेचने के लिए कम्पनियों के साथ करार कर ले कि आप मेरी फसल का मूल्य देकर ले लेंगे l

वस्तू अधिनियम में बदलाव – पहले भण्डारण पर रोक होती थी, कि आप इतना ही खरीद सकते है और इतना ही भण्डारण कर सकते है l आलू, प्याज, टमाटर, तिलहन आदी की l अब वो भण्डारण पर रोक हट गयी है – मर्जी हो इतना जमा करो l अब इससे किसानो को डर ये है कि अब फसल की कालाबाजारी शुरू हो जाएगी l माल को थोक में खरीद लिया जायेगा और जब जरुरत पड़ने पर किसानो का माल नहीं ख़रीदा जायेगा l 

एक कानून बताये जो किसान को अपना माल मंडी से बाहर बेचने से रोकता है किसान पर कोई पाबंदी नहीं है l यह पाबंदी तो व्यापारियों के लिए है l पी.एम. साहब ने क्या एहसान कर दिया ऐसा अद्द्यादेश लाकर l किसान को तो यह गारंटी चाहिए की ऐसी जगह हो जहाँ वो MSP से बेच सके l जब वो किसान जिस चीज को मांग नहीं रहा है और उसकी जरुरत भी नहीं है तो उसे क्यों दे रहे हो ? बेफालतू का एहसान कर रहे हो जिससे कुछ और नहीं आपकी ही फजीहत होनी है l

आप किसान का कितना भला कर रहे हो ? देश का किसान तो ख़ुशी के मारे आपको माला पहना देगा l अब बस करो हम तो पागल ही हो जायेगे l

आप रात के अधेरे में क्यों ऐसा काम कर रहे हो ? कब देश के किसान संगठनो से मिल कर बात हुई है ? जरुर नियत में खोट है तभी तो चोरी छिपे एसा काम कर रहे हो ? अगर भला चाहते हो तो खुल कर सबके साथ बात करके काम करते ये l

क्या मजाक है ये पी.एम. साहब? महाराष्ट्र में स्वाभिमानी पक्ष का कहना है कि ये जो कदम उठाया है यह किसानो के आर्थिक आजादी की ओर पहला कदम है l किसान सही मायने में आर्थिक आजाद हो जायेगा l उसको वो कीमत मिलेगी जिसके लिए वो मेहनत करता है l

ऐसा लगता है जैसे कुछ सालो पहले पिपली लाइव जो मूवी आई थी वो आज सार्थक साबित की जा रही है l भाई मंत्रीलोगो ! कही तुम देश की जनता और किसानो को बॉलीवुड तो नहीं समझ बैठे हो ? या फिर अपने आप को करन जोहर या यश चोपड़ा ही मान लिए हो l

इन तीनो अध्य्यादेशो से देश के किसानो को  नुकसान है लेकिन कोरपोरेट जगतौर बिचोलियों को बहुत फायदा होगा l इससे इनकी मनमानी बढ़ जाएगी l और इसके आलावा किसान के पास कोई विकल्प ही नहीं है l सरकार नंयूनतम मूल्य दिलाने की कोई बात तो कर ही नहीं रही है

बड़ी ऊँची आवाज में कहते हो किसानो की आय दोगुनी हो जाएगी l सरकार इन्हें मारने वाले भी आप ही है l फाँसी पर लटका वो किसान, उसका खेत, उसका परिवार और उसकी फसल आपको देख रही है l भाई जवाब तो आपसे मांग सकते नहीं है क्योकि आप तो सरकार है l जिसे उन्होंने खुद चुना है, तो बिचारे लाठियां ही खा रहे है है l आखिर लाठी भी तो उनके ही जंगलो से आ रही है l 


गाँव स्वशासन और पेसा कानून (Rajasthan)

गाँव स्वशासन और पे सा   कानून पत्थलगढ़ी / शिलालेख सन् 1865 में अंग्रेज सरकार द्वारा भारतीय वन विधेयक कानून लाया गया जिससे जंगल, वन.विभाग के ए...