Wednesday, October 4, 2023

गाँव स्वशासन और पेसा कानून (Rajasthan)


गाँव स्वशासन और पेसा कानून

पत्थलगढ़ी / शिलालेख

सन् 1865 में अंग्रेज सरकार द्वारा भारतीय वन विधेयक कानून लाया गया जिससे जंगल, वन.विभाग के एकाधिकार में आ गये। अंग्रेजों द्वारा इस काननू के जरिए जंगल को अपने नियंत्रण में लाने की प्रक्रिया शुरू की गयी जिसके कारण आदिवासियों की जमीन और जगंल से उनका अधिकार छीना जाने लगा। आदिवासी समाज जिस जमीन और जगंल को सामूहिक सम्पत्ति की तरह उपयोग करते थे। अंग्रेजों ने उन संसाधनों का व्यवसायीकरण करना शुरू कर दिया। आजादी के बाद से वही कानून आदिवासी समाज पर लागू है, जिसके कारण विभिन्न विकास योजनाओं में लगभग दो करोड़ आदिवासियों को विस्थापित होना पडा़। 

केन्द्र सरकार ने इस समस्या से आदिवासियों को छुटकारा दिलाने के उद्देश्य से वर्ष 1996 मे पंचायत उपबन्ध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार अधिनियम संसद द्वारा पारित किया गया जिससे आर्थिक एवं सामाजिक विकास व उनके विवाद निपटानें के तौर-तरिको को स्वशासन में मूल सिद्धान्त के रूप में सरंक्षण दिया जा सके। 
राजस्थान सरकार ने पंचायती राज (उपबन्धों का अनुसुचित क्षेत्रों में लागू होने सम्बन्धी उपान्तरण) अधिनियम तथा पेसा नियम 2011, नवम्बर माह 2011 से राज्य में लागू कर दिया। पेसा कानून में आदिवासी जनता को दिये गये अधिकार - 

1. मदिरा पर नियंत्रण - गाँव सभा समाज में शराब पीने से होने वाली बुराइयों से निपटने के लिए गाँव के लोगों के शराब पीने, गाँव में लोगों द्वारा शराब बनाने और गाँव में शराब बिक्री पर नियंत्रण कर सकती है। इसके लिए गाँव सभा बैठक करके एक संकल्प पत्र हस्ताक्षर करके इसकी एक प्रति जिला कलेक्टर और आबकारी आयुक्त राजस्थान, उदयपुर को भेजेगी। 

कलेक्टर, तहसीलदार रैंक के किसी वरिष्ठ अधिकारी या किसी समुचित अधिकारी को संकल्प पत्र की वास्तविकता को सत्यापित करने के लिए नियुक्त करेगा। अधिकारी जो अपनी रिर्पोट कलेक्टर को देगा उसे अपनी टिप्पणी के साथ कलेक्टर आबकारी आयुक्त, राजस्थान, उदयपुर को भेजेगा। आबकारी आयुक्त गाँव सभा मे ं संकल्प को कार्यान्वित करने के लिए आवश्यक कार्यवाही करेगा और गाँव सभा को जिले के कलेक्टर के माध्यम से सूचित करेगा। 

ग्राम सभा विशेष अवसरों जैसे नामकरण संस्कार, सगाई, विवाह, विवाद निपटारा के दौरान, मृत्युभोज, होली, दिपावली और आदिवासी जनजाति समुदाय की परम्पराओं और रूढ़ियों को ध्यान में रखते हुए ऐसे अन्य सामाजिक अवसरों पर गाँव सभा के निवासियों द्वारा देशी शराब के कब्जे व सीमायें निर्धारित करने के लिए सक्षम होगी।

2. जमीन की रक्षा - गाँव सभा यह सुनिश्चित कर सकती है कि अनुसूचित जनजातियों की जमीन गैर अनुसूचित जनजाति के व्यक्तियों को हस्तांतरित नहीं की जायेगी। गैर कानूनी ढ़गं से कब्जा की गयी जमीन को गाँव सभा वापस ले सकती है।

एक मजबूत गाँव सभा अपने प्राकृतिक ससंlधनों (जल, जंगल,जमीन और पहाड), की रक्षा करने में सक्षम है। चूकि आदिवासी क्षेत्रों मे बढते भूमि और पहाड़ों के अधिग्रहण (बांध और खनन) आदिवासीयों के अस्तित्व के लिए सबसे बडी़ चुनौती है। इसके लिए एक मजबूत ग्राम सभा पेसा कानून का उपयोग करते हुए अपनी जमीन और पहाड़ों को बचा सकती है।

3. भूमि अधिग्रहण - जब सरकार किसी अधिनियम के तहत भूमि का अधिग्रहण करना चाहती है तब सरकार गाँव सभा को प्रस्ताव के साथ निम्नलिखित जानकारी प्रस्तुत करेगी-

परियोजना की सम्पूर्ण रूपरेखा व प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण का रकबा व गाँव में बसने वाले नये लोग व समाज व पर्यावरण पर परियोजना का सम्भावित प्रभाव व गाँव के लोगों की प्रस्तावित भागीदारी (मुआवजे की राशि और रोजगार के अवसर) सम्पूर्ण जानकारी प्राप्त करने के बाद भूमि अधिग्रहण से प्रभावित गाँव सभायें सरकार या प्राधिकरण के प्रतिनिधियों को उपरोक्त पांचो जानकारीयों की सत्यता के परिक्षण के लिए गाँव सभा की बैठक में बुला सकती है। इस प्रकार से बुलाये गये व्यक्ति को सभी जानकारी सही से देना अनिवार्य है।

village PESA meeting 

4. लघु वन उपज पर मालिकाना अधिकार - गाँव सभायें लघुवन उपज का सग्रह, उपयोग कर सकती है। जिविका के लिए लघुवन उपज में शहद, मोम, छाल, महुआ, फूल, ऑयल सीड्स, जगंली झाड़िया, शाक, आंवला, बहेडा, आम, सीताफल, पपीता, जामुन, चारा, पलाश के पत्ते, बांस, जड़ी-बूटिया, बेत आदि उत्पाद शामिल है। 

5. गाँव के जल संसंसाधन - गाँव सभा गाँव के छोटे जल संसााधन जैसे नाला, तालाब, एनीकट का निर्माण और प्रबंधन गाँव सभा के अंतर्गत होगा l

6. गौण खनिज - गाँव सभा की सीमा में पाये जाने वाले गौण खनिज पर गाँव सभा का अधिकार है। गौण खनिज के सर्वे की अनुमति गाँव सभा से लेनी होगी। निलामी से लेकर खनन के मामलों में रियायत देने के पहले सिफारिश का अधिकार गाँव सभा को है।

7. गाँव के हाट बाजार के प्रबंधन का अधिकार - गाँव सभा स्थानीय स्तर पर लगने वाले दिहाडी बाजार, हाट बाजार, मेले आदि का आयोजन, उसके स्थान, पेयजल, सुरक्षा, संचालन का प्रबन्ध करेगी। इसके लिए गाँव सभा कुछ सदस्यों की समिति भी गठित कर सकती है और उसे इसकी जिम्मेदारी दे सकती है।

8. कर्ज के लेन-देन पर नियत्रंण - सूदखोर, महाजन, सरकारी या गैर सरकारी बैंकों, भूमि विकास बैंकों द्वारा आदिवासीयों को उधार देने पर गाँव सभा नियत्रंण रखेगी। किसी भी प्रकार से मूलधन से ज्यादा ब्याज नहीं वसूला जा सकेगा। उधार पर धन देने वालों को पंचायत से लाइसेन्स लेना अनिवार्य है, गैर कानूनी पाये जाने पर विधिवत कार्यवाही की जा सकती है और उन पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

9. विकास कार्यों के बारे में - सरकार की विभिन्न योजनाओ, कार्यक्रमों और जनयोजनाओं को कब, कहां और कैसे कार्यान्वित करना है इसके बारे में सबसे पहले गाँव सभा से अनुमति लेनी होगी। गरीबी उन्मूलन और अन्य कार्यक्रमों के अधीन लाभार्थियों के रूप में व्यक्तियों की पहचान और चयन का पूरा अधिकार गाँव सभा को है। 

10. वित्तिय व्यवस्था - गाँव पंचायत के लिए योजनाओं, कार्यक्रमों और परियोजनाओं के लिए आने वाली सभी निधियों पर गाँव सभा का नियंत्रण होगा। जो भी खर्च किया जायेगा उसका उपयोगिता प्रमाण-पत्र गाँव सभा को देना होगा।

11. संस्था और कार्यकर्ता पर नियंत्रण - पाचंवी अनुसूची क्षेत्रों में कार्यरत विभिन्न सरकारी, गैर सरकारी संस्थाओं जो क्षेत्र में विकास के लिए कार्य कर रहे है, ऐसी सस्ंथाआ,ेएजेंसियों जैसे उप स्वास्थ्य केन्द्र, आंगनवाड़ी, विद्यालय, पंचायतीराज संस्थान तथा स्थानीय कर्मचारीयों जैसे पटवारी, सचिव, अध्यापक, एनम आदि तथा गैर सरकारी कार्यकर्ता पर भी गाँव सभा का नियंत्रण होगा जिससे उन पर किये जा रहे खर्च एवं उपयोगिता परिभाषित हो सके।

Monday, June 14, 2021

राजस्थान डायन- प्रताड़ना निवारण अधिनियम-2015

संयुक्त राष्ट्र संघ ने वर्ष 2003 में जारी एक रिपोर्ट में बताया था कि भारत में 1987 से लेकर 2013 तक, 2 हजार 556 महिलाओं को डायन कह कर मार दिया गया.वर्ष 2010 के बीच डायन कहकर 528 औरतों की हत्या की गईं.क्या ये आंकड़े चैंकाने के लिए काफी नहीं.मात्र एक अंधविश्वास के कारण इतनी हत्याएं कर दी गईं.आजादी के इतने वर्षों बाद भी ऐसी घटनाएं क्या दर्शाती हैं?क्या वास्तव में हम आजाद हैं?यह सुनकर आपकी रूह नहीं कांपती?

राजस्थान डायन- प्रताड़ना निवारण अधिनियम-2015 को 26 जनवरी 2016 से राज्य में लागू कर दिया गया है।

डायन से क्या तात्पर्य है – ऐसी स्त्री जिसके लिए यह माना जाता है कि उसके पास कोई बुरी शक्ति है या वह स्त्री किसी बुरी शक्ति के कब्जे में है और वह किसी भी व्यक्ति या किसी की भी सम्पति को हानि पंहुचा सकती है l

डायन चिकित्सा – वह व्यक्ति जिसे गुनिया, तांत्रिक, ओझा या अन्य किसी नाम से जाना जाता है जो यह दावा करता हो कि वह भुत प्रेत या डायन को नियंत्रित कर सकता है l और बुरी आत्मा से मुक्त करने के लिए कोई अनुष्ठान करता हो l

डायन प्रथा में क्या समिलित है –

1 किसी स्त्री को डायन बोल कर दोष लगाना और मानहानि करना l

2 स्त्री को शारीरिक, मानसिक और सामाजिक तौर पर परेशान करना, उसकी सम्पति को

 नुकशान पहुचाना l

 डायन प्रथा के लिए दण्ड

1 एक वर्ष से लेकर पांच वर्ष तक का कठोर कारावास

2 50 हजार रूपए का जुर्माना

3 उपरोक्त दोनों ही

4 यदि किसी स्त्री को डायन बोलकर उसे घृणाजनक पदार्थ का सेवन करने को बाध्य करना, नग्न या कम वस्त्रो में या पुते हुए चेहरे के साथ दुसरो के सम्मुख प्रस्तुत करना इत्यादि तो उसके लिए तीन साल से सात साल की कठोर कारावास सजा और 50 हजार रूपए का जुर्माना तय है l

5 डायन चिकित्सक के लिए एक साल से तीन साल का कठोर कारावास और 10 हजार रूपए जुर्माना जो कि बढ़ा कर 50 हजार रूपए भी किया जा सकता है l

6 यदि प्रताड़ित की मृत्यु हो जाती है तो जो भी व्यक्ति इस घ्रणित कार्य में सम्मिलित है उन सभी को सात साल से लेकर आजीवन कारावास की सजा मिलती है l और जुर्माना 1 लाख से कम नहीं होगा l

Friday, October 16, 2020

जल और जल-संरक्षण – इंदिरा गाँधी नहर और राजस्थान का रेगिस्तानी इलाका

Water & water conservation : Indra Gandhi Canal & Desert Area of Rajasthan, India

जल और जल-संरक्षण – इंदिरा गाँधी नहर और राजस्थान का रेगिस्तानी इलाका

प्रकृति के अनमोल धरोहर मे से एक जल हैl जल ही जीवन हैl और हम सभी इसी बात से सहमत भी हैl जल मानव जीवन के लिए पहली प्राथमिक आवश्यकता है, इसी की मदद से मानव ने अपनी आवश्यकताओ को पूरा किया है और बड़े ही आश्चर्यजनक कार्य किये हैl जल हर युग, हर परिस्थिति में सबके केंद्र में और शुरुआत में रहा हैl जल ने इस धरती पर जहाँ जीवन देने का कार्य किया है वही अनकोनेक रूप बनाये और बिगाड़े है l


पानी की है एक कहानी – आज जो है बयानीl

वर्तमान में सारी दुनिया पर्यावरण अध्ययन पर जोर दे रही हैl यह आर्थिक विकास का दौर है जिसमे विकास तो हो रहा है लेकिन विकास की तुलना में प्राकृतिक संसाधनो का भारी दोहन हो रहा है l मानव के विकास से सम्बंधित यह दौड़ अनियंत्रित, असंतुलित और कही न कही अप्राकृतिक भी है l अब शायद मानव को यह समझ आने लगा है कि यह मानव समाज की मानव-विकास की नहीं मानव-विनाश की ओर दौड़ हैl यही वजह है कि मानव अब अपने सुरक्षित भविष्य को लेकर चिंतित हो रहा है और उपाय ढूंढ रहा है l धरती पर ‘जल एक अत्यधिक विरल संसाधन बनता जा रहा हैl ‘जल से सम्बंधित स्थितिया धीरे-धीरे गंभीर होती जा रही है l

सुखा ग्रस्त खेत में त्रस्त किसान और बारिश की नाउम्मीदी 

जनसँख्या की तीव्र वृद्धि और असीमित आकांक्षाओ ने जल के उपयोग के साथ ही दुरुपयोग को भी बेहिसाब बढ़ा दिया हैl लेकिन अगर इसके एवज में जल का समुचित प्रबंधन और संरक्षण नहीं किया जा रहा हैl जिसके चलते आज पूरी दुनिया के सामने ‘जल-संकट’ एक बड़ी ज्वलंत समस्या बनता जा रहा हैl बेहिसाब जल-दोहन, दुरूपयोग ने इस बहुमूल्य संसाधन को खतरे में पहुंचा दिया हैl

इसका एकमात्र उपाय ‘जल-प्रबंधन’ हैl

 जल-प्रबंधन – मानव विकास का प्रथम आधार ही जल हैl यही कारण है कि अब तक की सभी मानव सभ्यताऐ जलराशियों के साये में ही पनपती रही है, मानव प्रगति के प्रागेतिहसिक काल से ही कई महान सभ्यताओ ने जल-प्रबंधन के कार्य किये है, जैसे – प्राचीन भारतवर्ष में सिन्धुघटी – हड़प्पा की संस्कृति में किये गएl जितनी भी बड़ी सभ्यताओं ने जन्म लिया है और विकसित हुई है वो सभी नदियों के किनारे ही बढ़ी है l आज वर्तमान में सम्पूर्ण जल संसाधन का केवल एक प्रतिशत हिस्सा का 0.007 फीसदी हिस्सा ही जीवन के उपयोग में लिया जा रहा है, यह भी बिखरे हुए रूप में है l ऐसे में जल-प्रबंधन एक अहम कार्य और आवश्यकता है l इस धरती पर जो जल है वो मानव के जीवन जीने के प्रर्याप्त है किन्तु आवश्यकता है तो बस इसके उचित प्रबंधन की l पृथ्वी के लगभग 70 फीसदी क्षेत्र में जल-संसाधन है तो 15 मिलियन वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले शुष्क प्रदेश भी है जिनमे दुनिया के करीब 8 मिलियन वर्ग किलोमीटर में मरुस्थल फैले हैl

थार का रेगिस्तान

भारत में 2.34 लाख वर्ग किमी. जमीन पर मरुस्थल विद्यमान है l भारत में दो प्रकार के मरुस्थल हैl भारत के उत्तर-पश्चिम हिस्से में फैले मरुस्थल का 91 प्रतिशत क्षेत्र राजस्थान में ही हैl राजस्थान के 63.5 प्रतिशत भू-भाग पर मरुस्थल फैला हुआ हैl पश्चिमी राजथान के जैसलमेर में शुष्क मरुस्थल अवस्थित हैl रेगिस्तान प्रकृति की एक अद्भुत संरचना का ही नमूना हैl विशालकाय रेत के धौरे, गर्म लू के जानलेवा थपेड़े, भूमिगत जल का अभाव से ग्रषित किसी भी मरुस्थलीय क्षेत्र में जल एक भयंकर त्रासदी और विकट समस्या है l प्राकृतिक जल राजस्थान के लिए हमेशा ही एक ऐसी पहेली रहा है कि यहाँ सब कुछ मिल जायेगा लेकिन पानी नहीं मिल पता था l

लम्बे अरसे तक तक बारिश नहीं होती और अगर बारिश होती भी तो इतना न्यूनतम की प्रकृति के किसी भी प्राणमय जीवन के लिए प्रयाप्त नहीं होती फिर चाहे वो पेड़ हो या जीव-जंतु और मनुष्यl कुओं में पानी नहीं और हैण्डपंप भी एकदम बेकार l यहाँ पानी की उपलब्धता, इसके विकास के कार्य और जल के स्थायीपन के लिए कार्य करना सीधे प्रकृति को चुनौती देने के समान ही है l सतही जलस्रोत जीवन और विकास के लिए महत्त्वपूर्ण और उपयोगी है l 

कोटा जिले के एक गाँव में कुँए से पानी निकालने की जद्दोजेहत 

विकास प्रकृति और मानव समाज की एक सतत चलने वाली प्रक्रिया हैl इस विकास का प्रथम आधार ही जल हैl वर्तमान में मानव ने विकसित सुनियोजित योजनाओ के माध्यम से जल को ही सभ्यताओ के अपने निकट ला दिया हैl मानव ने राजस्थान में अदम्य साहस के दम पर यह कर दिखाया हैl 
एक ‘जीवन जल रेखा’ के रूप में इन्दिरा गाँधी नहर को यहाँ की प्यासी सूखी भूमि को हरियाली से आच्छादित करने के लिए और विकास के लिए एक अविस्म्रनीय जल प्रबंधन तंत्र स्थापित किया हैl वास्तव में तो इसने राजस्थान की परिस्थितियां ही बदल दी हैl प्रशासनिक दृष्टि से इस नहर योजना में राजस्थान के जैसलमेर, हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर, बीकानेर एवं बाड़मेर का भू-भाग समिलित है l इससे क्षेत्र के शुष्क जिलो में पानी की आपूर्ति का एक मजबूत ताना-बाना बना दिया गया हैl रेत के धौरे स्थिर हो रहे है, भारी उद्योग धंधे विकसित हो रहे है l क्षेत्र के जलवायु-वातावरण एवं तापमान में भी परिवर्तन आ रहा हैl मानव रहित क्षेत्र में अब जनदबाव बढ़ रहा हैl यहाँ का जीवन और मानव, उद्योग विकास की मुख्य धारा से जुड़ चुके हैl
 

लेकिन इसके साथ ही समस्याएं भी बढती चली जा रही है, उचित प्रबंधन, योजना और निरंतर शोध के अभाव में जल-प्रबंधन में चुनोतियो का सामना करना पड़ रहा हैl जो की सवाभाविक हैl यदि समय रहते इन समस्याओ का हल नहीं निकला तो क्षेत्र का भविष्य खतरे में नजर आता है l जल-संरक्षण में भविष्य में पर्यावरण, पारिस्थिकी प्रकृति पर अनुकूल और प्रतिकूल प्रभावो का वैज्ञानिक अध्ययन, तकनिकी नियोजन की भी बहुत आवश्यकता है l इंदिरा गाँधी नहर परियोजना से यहाँ के पर्यावरण, वातावरण, सथानीय पारिस्थिकी में परिवर्तन आ रहे है जो दृष्टिगोचर भी हैl जैसे – विश्व प्रसिद्ध सेवन घास के क्षेत्र समाप्त हो रहे है या मरुस्थल सिमट रहे हैl यहाँ की जैविक विविधता भी परिवर्तित हो रही है, स्थानीय छोटी-बड़ी वन्य-जीव प्रजातीया समाप्त हो रही है l राजस्थान में इंदिरा गाँधी नहर के उचित प्रबंधन और जल-प्रबंधन के कार्यो में नीतिगत एवं क्रियान्वयन में इच्छा शक्ति भक्ति की कमी रही हैl यहाँ जो भी विकास हो रहा है वो स्थानीय पारिस्थितिकी के अनुकूल नहीं हो रहा है l क्षेत्र में प्राकृतिक संसाधनों का भारी मात्रा में दोहन किया जा रहा है l इंदिरा गांधी नहर निकले जाने से क्षेत्र में खनिज संसाधन विकास को भारी प्रोत्साहन मिला है, खनिज व्यवसाय को इतनी सुविधा और तेजी से संसाधन का दोहन, शोधन एवं खोज में बहुत इजाफा हो गया है l इस क्षेत्र से तेल, प्राकृतिक गैस, और अन्य खनिजो का तेजी से खनन हो रहा है जिसे दुसरे शब्दों में हम संसाधन का अनियमित दोहन भी कह सकते है l नहर के आने से भूमिगत जल – स्तर में सुधर आ रहा है लेकिन बारिश में पानी की अधिकता से जलाक्रांत की समस्या भी आने लगी है l जैसा कि बाड़मेर में अक्सर बारिश में होने लगा है l

हाल में, जयपुर : राजस्थान सरकार ने एक नोटिस जारी किया है l जिसमे 13 तहसीलों के 1388 गाँवो को सुखा ग्रस्त घोषित कर दिया है l जिसमे बाड़मेर, जैसलमेर, जोधपुर, और हनुमानघड जिले के गाँव शामिल है l यह ऑफिसियल स्टेटमेंट नोव्म्बेर,2019 को निकला है l इसमें 223 गाँव बाड़मेर, 672 गाँव जैसलमेर, 310 गाँव जोधपुर और 183 गाँव हनुमानगड के है l

इदिरा गाँधी नहर क्षेत्र में कुछ खास समस्याए भी देखि जा सकती है जैसे –

1.      पारिस्थिकी परिवर्तन

2.      जलाक्रांत की समस्या

3.      सेवन घास क्षेत्र सिमटना

4.      राष्टीय मरूउद्यान को संकट

5.      वन्य जीव-जन्तुओ पर संकट

6.      सिमित प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधित, अनियंत्रित दोहन

7.      प्रदुषण

8.      स्थायित्व के प्रतिकूल विकास

9.      संतुलन और उचित प्रबंधन न होना

यदि बात अब समाधान की चले तो जो भी समस्याए है उनका सही, चरणबद्ध तरीके और सही से योजना बन कर हल करने की कोशिश की जाये तो ये सभी समस्याए दूर हो सकती है l 

Tuesday, September 15, 2020

List of Presidents of India

 भारत के राष्ट्रपतियों की सूची

भारत का राष्ट्रपति देश का मुखिया और भारत का प्रथम नागरिक है। राष्ट्रपति के पास भारतीय सशस्त्र सेना की भी सर्वोच्च कमान है। भारत का राष्ट्रपति लोक सभा, राज्यसभा और विधानसभा के निर्वाचित सदस्यों द्वारा चुना जाता है। भारत के राष्ट्रपति का कार्यकाल 5 वर्षों का होता है। राष्ट्रपति भवन का मुख्य द्वार, जो भारत के राष्ट्रपति का अधिकारिक आवास है l

भारत की स्वतंत्रता से अबतक 13 राष्ट्रपति हो चुके है। भारत के राष्ट्रपति पद की स्थापना भारतीय संविधान के द्वारा की गयी है। इन 13 राष्ट्रपतियों के अलावा 3 कार्यवाहक राष्ट्रपति भी हुए है। भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ॰ राजेंद्र प्रसाद थे। दो राष्ट्रपति, ज़ाकिर हुसैन और फ़ख़रुद्दीन अली अहमद, जिनकी पदस्थ रहते हुए मृत्यु हुई

पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल भारत की पहली महिला राष्ट्रपति है।

भारत के राष्ट्रपतियों की सूचि इस प्रकार है ( अंत में चित्र संग्रह)

क्र.सं

नाम

पदग्रहण

पदमुक्त

उपराष्ट्रपति

1

डॉ॰राजेंद्रप्रसाद

26 जनवरी 1950

13 मई 1962

डॉ॰सर्वपल्ली राधाकृष्णन

2

डॉ॰सर्वपल्ली राधाकृष्णन

13 मई 1962

13 मई 1967

ज़ाकिर हुसैन

3

ज़ाकिर हुसैन

13 मई 1967

03 मई 1969

वराहगिरि वेंकट गिरि

4

वराहगिरि वेंकट गिरि 

03 मई 1969

20 जुलाई 1969

5

मुहम्मद हिदायतुल्लाह

20 जुलाई 1969

24अगस्त 1969

6

वराहगिरि वेंकट गिरि 

24 अगस्त 1969

24 अगस्त 1974

गोपाल स्वरुप पाठक

7

फ़ख़रुद्दीन अली अहमद

24 अगस्त 1974

11 फ़रवरी 1977

बासप्पा दनप्पा जत्ती

8

बासप्पा दनप्पा जत्ती 

11 फ़रवरी 1977

25 जुलाई 1977

9

नीलम संजीव रेड्डी

25 जुलाई 1977

25 जुलाई 1982

मुहम्मद हिदायतुल्लाह

10

ज्ञानी जैल सिंह

25 जुलाई 1982

25 जुलाई 1987

रामास्वामी वेंकटरमण

11

रामास्वामी वेंकटरमण 

25 जुलाई 1987

25 जुलाई 1992

शंकरदयाल शर्मा

12

शंकरदयाल शर्मा 

25 जुलाई 1992

25 जुलाई 1997

के. आर. नारायणन

13

के. आर. नारायणन 

25 जुलाई 1997

25 जुलाई 2002

कृष्ण कान्त

14

ऐ.पी.जे. अब्दुल कलाम

25 जुलाई 2002

25 जुलाई 2007

भैरोंसिंह शेखावत

15

प्रतिभा पाटिल

25 जुलाई 2007

25 जुलाई 2012

मोहम्मद हामिद अंसारी

16

प्रणब मुखर्जी

25 जुलाई 2012

24 जुलाई 2017

मोहम्मद हामिद अंसारी

17

रामनाथ कोविन्द

25 जुलाई 2017

25 July 2022

वेंकैया नायडू

 चित्र संग्रह - 

Dr. Rajendra Prasad

S.Radhakrishnan

Zakir-Husain
v v giri

Fakhruddin_Ali_Ahmed
NeelamSanjeevaReddy

Giani_Zail_Singh

Ramaswamy_Venkataraman

Shankar_Dayal_Sharma
K R Narayanan

APJ Abdul Kalam
Pratibha patil
Pranab_Mukherjee
Ramnath Kovind

गाँव स्वशासन और पेसा कानून (Rajasthan)

गाँव स्वशासन और पे सा   कानून पत्थलगढ़ी / शिलालेख सन् 1865 में अंग्रेज सरकार द्वारा भारतीय वन विधेयक कानून लाया गया जिससे जंगल, वन.विभाग के ए...